बातें व्यर्थ है अनुभव व्यर्थ नहीं है

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osho quote in hindi

आत्मा, परमात्मा, मोक्ष शब्द की उनके, विचार की भांति दो कौड़ी के हैं। अनुभव की भांति उनके अतिरिक्त और कोई जीवन नहीं। बुद्ध ने मोक्ष को व्यर्थ नहीं कहा है, मोक्ष की बातचीत को व्यर्थ कहा है। परमात्मा को व्यर्थ नहीं कहा है। लेकिन परमात्मा के संबंध में सिद्धांतों का जाल, शास्त्रो का जाल, उसको व्यर्थ कहा है।

ईश्वर की बहुत चर्चा करते – करते तुम्हें लगता है इश्वर को जान लिया। लेकिन ईश्वर के संबंध में जानना इश्वर को जानना नहीं है। तो बुद्ध कहतें हैं कि अगर जानना हीं हो तो परमात्मा के संबंध में मत सोचो, अपने संबध में सोचो। क्योंकि मूललत: तुम बदल जाओगे, तुम्हारी आंख बदल जाए, तुम्हारे देखने का ढंग बदले, तुम्हारे बंद झरोखे खुले, तुम्हारा अंतर्तम रोशन हो, तो तुम परमात्मा को जान लोगे। फिर बात थोड़े हीं करनी पड़ेगी।

ज्ञान मौन है, गहन चुप्पी है। कहना भी चाहोगे, जबान न हिलेगी। बोलना चाहोगे चुप्पी पकड़ लेगी। इतना बड़ा जाना है कि शब्दों में समाता नही। पहले शब्दो की बात बड़ी आसान थी। जाना हीं नहीं था कुछ, तो पता हीं नहीं था कि तुम क्या कह रहे हो। जब तुम ईश्वर शब्द का उपयोग करते हो तो तुम कितने महत्तम शब्द का उपयोग कर रहे हो, इसका कुछ पता न था। ईश्वर शब्द कोरा था, खाली था। अब अनुभव हुआ। महाकाश समा गया उस छोटे से शब्द में। अब उस छोटे से शब्द को मुह से निकलना झूठा करना है। अब कहना नही है। अब तुम्हारा पूरा जीवन कहेगा।

इसलिए बुद्ध ने कहा, बात मत करो। चर्चा की बात नही है। पीना पड़ेगा। जीना पड़ेगा। अनुभव करना होगा।

💘 एस धम्मो सनंतनो 💘

Rajneesh Osho

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