Philosophical Quotes

गुरु कौन

  शास्त्रों मे कहा है - गुरु के प्रति श्रद्धा होनी चाहिए, मैं तुमसे कहता हूँ जिसके प्रति श्रद्धा हो, वह गुरु। गुरु के प्रति श्रद्धा होनी चाहिए, यह कोई चाहने की बात है? यह कोई चाहत से हो सकती है? जिसके प्रति श्रद्धा पैदा हो जाए, वह गुरु। जिसके… Read More

आस्तिक और नास्तिक में श्रेष्ठ कौन है?

प्रश्न:- आस्तिक और नास्तिक में श्रेष्ठ कौन है..? उत्तर:- मैं नास्तिकों की ही तलाश में हूँ, वे ही असली पात्र हैं। आस्तिक तो बड़े पाखंडी हो गए हैं। आस्तिक तो बड़े झूठे हो गए हैं। अब आस्तिको में सच्चा आदमी कहाँ मिलता है? अब वे दिन गए, जब आस्तिक सच्चे… Read More

💖जिंदगी में कुछ जीवंत सत्य है जो स्वयं ही जाने जाते है💖

  एक मुसलमान फकीर हुआ, नसरुद्दीन वह एक नदी पार कर रहा था एक नाव में बैठ कर। रास्ते में मल्लाह और नसरुद्दीन कि बातचीत भी होती रही नसरुद्दीन बड़ा ज्ञानी आदमी समझा जाता था। ज्ञानियों को हमेशा कोशिश रहती है किसी को अज्ञानी सिद्ध करने का मौका मिल जाए… Read More

🌹जीवन में व्रत का क्या मूल्य है? 🌹

व्रत का मूल्य तो जरा भी नहीं, बोध का मूल्य है। व्रत का तो अर्थ ही होता है, बोध की कमी है। उसकी परिपूर्ति तुमने व्रत से कर ली। तुमने देखा, झूठे आदमी ज्यादा कसमें खाते हैं। हर बात में कसम खाने को तैयार रहते हैं। झूठा आदमी कसम के… Read More

जीवंत होने का अर्थ है चुनौती ताजी रहे, रोज नए की खोज जारी रहे

जीवंत होने का अर्थ है: चुनौती ताजी रहे, रोज नए की खोज जारी रहे। क्योंकि नए की खोज में ही तुम अपने भीतर जो छिपे हैं स्वर, उन्हें मुक्त कर पाओगे। नए की खोज में ही तुम नए हो पाओगे। जैसे ही नए की खोज बंद होती है कि तुम… Read More

आज का दिन व्यर्थ में बर्बाद मत करो

  यदि किसी भूल के कारण कल का दिन दु:ख में बीता है तो उसे याद कर आज का दिन व्यर्थ में बर्बाद मत करो। स्वामी विवेकानंद yadi kisi bhul ke karan kal ka din dukh me beeta hai to use yaad kar aaj ka din vyarth me barbaad mat… Read More

पत्नी की देह परमात्मा की पहली परत

  तुम जब अपनी पत्नी में डूबते हो या अपने पति में डूबते हो, तब भी तुम परमात्मा का ही रस लेना चाह रहे हो। सिर्फ तुमने ज़रा लंबा रास्ता चुना है देह, फिर देह के भीतर मन है, और मन के भीतर आत्मा है–और आत्मा के भीतर परमात्मा छिपा… Read More

मन को निस्तरंग करो

  काश! हम शांत हो सकें और भीतर गूंजते शब्दों और ध्वनियों को शून्य कर सकें, तो जीवन में जो सर्वाधिक आधारभूत है, उसके दर्शन हो सकते हैं। सत्य के दर्शन के लिए शांति के चक्षु चाहिए। उन चक्षुओं को पाये बिना जो सत्य को खोजता है, वह व्यर्थ ही… Read More

शब्द संभाले बोलिए शब्द के हाथ न पांव

शब्द संभाले बोलिए, शब्द के हाथ न पावं एक शब्द करे औषधि, एक शब्द करे घाव कबीरदास Read More

नथनी दिनी यार ने तो चिंतन बारम्बार

नथनी दिनी यार ने तो चिंतन बारम्बार, और नाक दिनी करतार ने प्यारे उनको तो दिया बिसार 🌻कबीरदास🌻 Read More

शून्य में लीन होते ही अनहद सुनाई देगा

जैसे धरती सागर में डूब जाए और प्रलय हो जाए, ऐसे ही तुम जब अपने ही शून्य में लीन हो जाते हो तब अनहद सुनाई पड़ता है; तब उसकी मुरली की तान सुनाई पड़ती है। मंदिरों में तुमने कृष्ण की मूर्ति बना रखी है मुरली लिए हुए! लाख जतन करो!… Read More

चेतना का न जन्म होता है न मृत्यु वह सदा वर्तमान है

ओशो का भौतिक शरीर तो 11 दिसंबर 1931 को पैदा हुआ और 19 जनवरी 1990 को इस दुनिया से विदा हुआ। लेकिन केवल शरीर के विदा होने से विदा होने वाली वह चेतना नहीं है। इस ग्रह से जाने से पहले उन्होंने अपनी समाधि पर जो लिखवाया वह बहुत अर्थ… Read More

अगर प्यास न हो तो धर्म की बात ही छोड़ दो

अगर प्यास न हो तो धर्म की बात ही छोड़ दो। अभी धर्म का क्षण नहीं आया। अभी थोड़े और भटको। अभी थोड़ा और दुख पाओ। अभी दुख को तुम्हें मांजने दो। अभी दुख तुम्हें और निखारेगा। अभी जल्दी मत करो। अभी बाजार में ही रहो। अभी मंदिर की तरफ… Read More

आशा रखोगे तो निराशा ही हाथ लगेगी

जीवन में न तो उदासी है और न निराशा है। उदासी और निराशा होगी--तुममें। जीवन तो बड़ा उत्फुल्ल है। जीवन तो बड़ा उत्सव से भरा है। जीवन जीवन तो सब जगह--नृत्यमय है; नाच रहा है। उदास...? तुमने किसी वृक्ष को उदास देखा? और तुमने किसी पक्षी को निराश देखा? चांदत्तारों में तुमने उदासी… Read More

बातें व्यर्थ है अनुभव व्यर्थ नहीं है

आत्मा, परमात्मा, मोक्ष शब्द की उनके, विचार की भांति दो कौड़ी के हैं। अनुभव की भांति उनके अतिरिक्त और कोई जीवन नहीं। बुद्ध ने मोक्ष को व्यर्थ नहीं कहा है, मोक्ष की बातचीत को व्यर्थ कहा है। परमात्मा को व्यर्थ नहीं कहा है। लेकिन परमात्मा के संबंध में सिद्धांतों का… Read More

This website uses cookies.