ओशो के कुछ महत्वपूर्ण विचार – Osho Quotes on Life in Hindi ओशो एक ऐसे दार्शनिक और आध्यात्मिक गुरु थे जिन्होंने जीवन के लगभग हर पहलू पर अपने विचार रखें हैं, लेकिन उन्होने अपने हर विचार में ध्यान पर मुख्य रूप से ज़ोर दिया है, ओशो ने अपने प्रवचनों में […]

हर घर अपना घर, पर बंजारा मन। गली-गली भटके, यह आवारा मन।। एक से हजार हुआ, यह सारा मन। गिर कर न सिमटे फिर, यह पारा मन। खुद को ही जीत-जीत, है हारा मन। कितना बेबाक, कितना बेचारा मन। हर घर अपना घर, पर बंजारा मन। गली-गली भटके, यह आवारा […]

प्रश्न:- आस्तिक और नास्तिक में श्रेष्ठ कौन है..? उत्तर:- मैं नास्तिकों की ही तलाश में हूँ, वे ही असली पात्र हैं। आस्तिक तो बड़े पाखंडी हो गए हैं। आस्तिक तो बड़े झूठे हो गए हैं। अब आस्तिको में सच्चा आदमी कहाँ मिलता है? अब वे दिन गए, जब आस्तिक सच्चे […]

  एक मुसलमान फकीर हुआ, नसरुद्दीन वह एक नदी पार कर रहा था एक नाव में बैठ कर। रास्ते में मल्लाह और नसरुद्दीन कि बातचीत भी होती रही नसरुद्दीन बड़ा ज्ञानी आदमी समझा जाता था। ज्ञानियों को हमेशा कोशिश रहती है किसी को अज्ञानी सिद्ध करने का मौका मिल जाए […]

व्रत का मूल्य तो जरा भी नहीं, बोध का मूल्य है। व्रत का तो अर्थ ही होता है, बोध की कमी है। उसकी परिपूर्ति तुमने व्रत से कर ली। तुमने देखा, झूठे आदमी ज्यादा कसमें खाते हैं। हर बात में कसम खाने को तैयार रहते हैं। झूठा आदमी कसम के […]

जीवंत होने का अर्थ है: चुनौती ताजी रहे, रोज नए की खोज जारी रहे। क्योंकि नए की खोज में ही तुम अपने भीतर जो छिपे हैं स्वर, उन्हें मुक्त कर पाओगे। नए की खोज में ही तुम नए हो पाओगे। जैसे ही नए की खोज बंद होती है कि तुम […]

  दुख उधार का है, आनंद स्वयं का है। आनंदित कोई होना तो अकेले भी हो सकता है; दुखी होना चाहे तो दूसरे की जरुरत है। कोई धोखा दे गया; किसी ने गाली दे दी; कोई तुम्हारे मन की अनुकूल न चला- सब दुख दूसरे से जुड़े है। और आनंद […]

[box type=”shadow” align=”” class=”” width=””] संसार में जाना, अपने से बाहर जाना–एक ही बात है। परमात्मा में जाना, अपने भीतर जाना–एक ही बात है। जिस दिन तुम अपने अंतरतम में पहुंच जाते हो, उस दिन तुम कैलाश के शिखर पर विराजमान हो गए। संसार चारों तरफ चलता ही रहता है, […]

[box type=”shadow” align=”” class=”” width=””] 🌹दुनिया में और सब कलाएं बाहर हैं। मूर्तिकार मूर्ति बनाता है, चित्रकार चित्र बनाता है, गीतकार गीत बनाता है। लेकिन बुद्ध कहते हैं, असली ज्ञानी अपने को बनाता है। मूर्ति को नहीं गढ़ता, अपने को गढ़ता है। चित्र को नहीं रंगता, अपने को रंगता है। […]

  तुम जब अपनी पत्नी में डूबते हो या अपने पति में डूबते हो, तब भी तुम परमात्मा का ही रस लेना चाह रहे हो। सिर्फ तुमने ज़रा लंबा रास्ता चुना है देह, फिर देह के भीतर मन है, और मन के भीतर आत्मा है–और आत्मा के भीतर परमात्मा छिपा […]