शून्य में लीन होते ही अनहद सुनाई देगा

जैसे धरती सागर में डूब जाए और प्रलय हो जाए,
ऐसे ही तुम जब अपने ही शून्य में लीन हो जाते हो तब अनहद सुनाई पड़ता है;
तब उसकी मुरली की तान सुनाई पड़ती है।
मंदिरों में तुमने कृष्ण की मूर्ति बना रखी है मुरली लिए हुए!

लाख जतन करो! पूजा पाठ कर्म क्रियाएँ करो!

कुछ भी न होगा। वह तो प्रतीक है।
वह तो केवल काव्य प्रतीक है, प्यारा प्रतीक है।
समझो-बूझो तो बड़ा प्यारा है।
और ऐसे ही सिर पटकते रहो,
आरती उतारते रहो कर्म कांड करते रहो,
वह तो बिल्कुल व्यर्थ है!

शून्य ही अनहद नाद सुनने का रास्ता है…….!!

🌹Osho🌹

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