[box type=”shadow” align=”” class=”” width=””] 🌹दुनिया में और सब कलाएं बाहर हैं। मूर्तिकार मूर्ति बनाता है, चित्रकार चित्र बनाता है, गीतकार गीत बनाता है। लेकिन बुद्ध कहते हैं, असली ज्ञानी अपने को बनाता है। मूर्ति को नहीं गढ़ता, अपने को गढ़ता है। चित्र को नहीं रंगता, अपने को रंगता है। […]

  तुम जब अपनी पत्नी में डूबते हो या अपने पति में डूबते हो, तब भी तुम परमात्मा का ही रस लेना चाह रहे हो। सिर्फ तुमने ज़रा लंबा रास्ता चुना है देह, फिर देह के भीतर मन है, और मन के भीतर आत्मा है–और आत्मा के भीतर परमात्मा छिपा […]

  काश! हम शांत हो सकें और भीतर गूंजते शब्दों और ध्वनियों को शून्य कर सकें, तो जीवन में जो सर्वाधिक आधारभूत है, उसके दर्शन हो सकते हैं। सत्य के दर्शन के लिए शांति के चक्षु चाहिए। उन चक्षुओं को पाये बिना जो सत्य को खोजता है, वह व्यर्थ ही […]

जैसे धरती सागर में डूब जाए और प्रलय हो जाए, ऐसे ही तुम जब अपने ही शून्य में लीन हो जाते हो तब अनहद सुनाई पड़ता है; तब उसकी मुरली की तान सुनाई पड़ती है। मंदिरों में तुमने कृष्ण की मूर्ति बना रखी है मुरली लिए हुए! लाख जतन करो! […]

अगर प्यास न हो तो धर्म की बात ही छोड़ दो। अभी धर्म का क्षण नहीं आया। अभी थोड़े और भटको। अभी थोड़ा और दुख पाओ। अभी दुख को तुम्हें मांजने दो। अभी दुख तुम्हें और निखारेगा। अभी जल्दी मत करो। अभी बाजार में ही रहो। अभी मंदिर की तरफ […]

जीवन का एक नियम है कि अगर तुम प्रतीक्षा कर सको तो सभी चीजें पूरी हो जाती हैं। जीवन का ढंग चीजों को पूरा करने का है; अगर तुम प्रतीक्षा कर सको। कच्चे फल मत तोड़ो, थोड़ी प्रतीक्षा करो; वे पकेंगे, गिरेंगे। तुम्हें तोड़ना भी न पड़ेगा, वृक्ष पर चढ़ना […]

परमात्मा के द्वार पर केवल उन्ही का स्वागत है जो स्वयं जैसे है! उस द्वार से राम तो निकल सकते है, लेकिन रामलीला के राम का निकलना संभव नहीं है! और जब भी कोई बाह्य आदर्शो से अनुप्रेरित हो स्वयं को ढालता है, तो वह रामलीला का राम ही बन […]

[box type=”shadow” align=”” class=”” width=””] परमात्मा शराब है। हां, शराब जब पी लोगे तो तुम्हारे जीवन में जो अलमस्ती होगी, प्रार्थना उसी अलमस्ती का एक रंग है। नृत्य होगा, गीत होगा; वे सब उसी अलमस्ती से निकलेंगे। वे उसी अलमस्ती की धाराएं हैं। अलमस्ती की गंगोत्री से प्रार्थना की गंगा […]

[box type=”shadow” align=”” class=”” width=””]   प्रेम से भरी हुई आँख जहाँ पड़ेगी वहीं मंदिर निर्मित हो जाएंगे जहाँ प्रेम से भरा हुआ हृदय धड़केगा, वहीं एक और नया काबा बन जाएगा, एक नयी काशी पैदा होगी, क्योंकि जहाँ प्रेम है, वहाँ परमात्मा प्रकट हो जाता है। प्रेम भरी आँख […]

[box type=”shadow” align=”aligncenter” class=”” width=””]   मित्र तो वही है जो तुम्हारे दोष को प्रकट कर दे दुश्मन वही है जो तुम्हारे दोष को ढांक दे लेकिन अब तक तुम्हारी परिभाषा अलग है, तुम मित्र उसे कहते हो जो तुम्हारे दोष ढांके दुश्मन उसे कहते हो जो तुम्हारे दोष उभारे[/box] […]

  • 1
  • 2