[box type=”shadow” align=”” class=”” width=””] संसार में जाना, अपने से बाहर जाना–एक ही बात है। परमात्मा में जाना, अपने भीतर जाना–एक ही बात है। जिस दिन तुम अपने अंतरतम में पहुंच जाते हो, उस दिन तुम कैलाश के शिखर पर विराजमान हो गए। संसार चारों तरफ चलता ही रहता है, […]

[box type=”shadow” align=”” class=”” width=””] 🌹दुनिया में और सब कलाएं बाहर हैं। मूर्तिकार मूर्ति बनाता है, चित्रकार चित्र बनाता है, गीतकार गीत बनाता है। लेकिन बुद्ध कहते हैं, असली ज्ञानी अपने को बनाता है। मूर्ति को नहीं गढ़ता, अपने को गढ़ता है। चित्र को नहीं रंगता, अपने को रंगता है। […]

मैं शराबियों को भी संन्यास देता हूं। और उनसे कहता हूं, बेफिक्री से लो! पंडितों से तो तुम बेहतर हो। कम से कम विनम्र तो हो। कम से कम यह तो पूछते हो सिर झुकाकर कि क्या मैं भी पात्र हूं ??? क्या मेरी भी योग्यता है ??? क्या आप […]

अगर प्यास न हो तो धर्म की बात ही छोड़ दो। अभी धर्म का क्षण नहीं आया। अभी थोड़े और भटको। अभी थोड़ा और दुख पाओ। अभी दुख को तुम्हें मांजने दो। अभी दुख तुम्हें और निखारेगा। अभी जल्दी मत करो। अभी बाजार में ही रहो। अभी मंदिर की तरफ […]

जीवन में न तो उदासी है और न निराशा है। उदासी और निराशा होगी–तुममें। जीवन तो बड़ा उत्फुल्ल है। जीवन तो बड़ा उत्सव से भरा है। जीवन जीवन तो सब जगह–नृत्यमय है; नाच रहा है। उदास…? तुमने किसी वृक्ष को उदास देखा? और तुमने किसी पक्षी को निराश देखा? चांदत्तारों में तुमने उदासी […]

जीवन का एक नियम है कि अगर तुम प्रतीक्षा कर सको तो सभी चीजें पूरी हो जाती हैं। जीवन का ढंग चीजों को पूरा करने का है; अगर तुम प्रतीक्षा कर सको। कच्चे फल मत तोड़ो, थोड़ी प्रतीक्षा करो; वे पकेंगे, गिरेंगे। तुम्हें तोड़ना भी न पड़ेगा, वृक्ष पर चढ़ना […]

आपका वीर्य-कण दो तरह की आकांक्षाएं रखता है। एक आकांक्षा तो रखता है बाहर की स्त्री से मिलकर, फिर एक नए जीवन की पूर्णता पैदा करने की। एक और गहन आकांक्षा है, जिसको हम अध्यात्म कहते हैं, वह आकांक्षा है, स्वयं के भीतर की छिपी स्त्री या स्वयं के भीतर […]

[box type=”shadow” align=”” class=”” width=””] मित्रता का मतलब है कि तुमने किसी अन्य व्यक्ति को स्वयं से ज्यादा महत्वपूर्ण माना यह व्यापार नहीं है यह अपने आप में पवित्र प्रेम है !!ओशो!! [/box]

मनोवैज्ञानिक कहते है, अधिक लोग बूढ़े होकर धार्मिक होने शुरू हो जाते हैं, लोभ के कारण। जवान आदमी से मौत जरा दूर होती है। अभी दूसरे लोक की इतनी चिंता नहीं होती। अभी आशा होती है कि यहीं पा लेंगे, जो पाने योग्य है। यहीं कर लेंगे इकट्ठा। लेकिन मौत […]

Rajneesh Osho Quotes in Hindi मनुष्य मनुष्य की सबसे बड़ी कृति स्वयं मनुष्य है । और मनुष्य का सबसे बड़ा सृजन स्वयं का निर्माण है । और आप कुछ भी बनाये, वह बनाना किसी काम का नहीं है । वह सब पानी पर खींची गई लकीरों की तरह मिट जायेगा […]

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